अक्कड़-बक्कड़ बम्बे बो आसमान में बादल सौ । सौ बादल हैं प्यारे रंग हैं जिनके न्यारे । हर बादल की भेड़ें सौ हर भेड़ के रंग हैं दो । भेड़ें दौड़ लगाती हैं नहीं पकड़ में आती हैं । बादल थककर चूर हुआ रोने को मज़बूर हुआ । आँसू धरती पर आए नन्हें पौधे हरषाए ।
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साहित्य अकादेमी, नई दिल्ली की ओर से राजस्थानी बाल साहित्य में 2012 में
पुरस्कृत मेरी राजस्थानी संस्मरण/निबंध पुस्तक ‘बाळपणै री बातां’ में प्रकाशित
कहानी...
ऐसा लगता है इबादत को चले आते हैं : siya
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जब भी हम तेरी ज़ियारत को चले आते हैं
ऐसा लगता है इबादत को चले आते हैं
बस दिखावे की मुहब्बत को चले आते हैं
लोग रस्मन भी अयादत को चले आते हैं
देखकर आपको इस द...
कविता : पप्पू की जिद
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सुबह सवेरे पप्पूजी
बागीचे में जब उठ कर आये,
देख के घोंसला चिड़िया का
ख़ुशी से थे चीखे चिल्लाये,
ताली मारते, उछ्लते-कूदते
दौड़ के फिर वो घर में...
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